Mahamaya Tantra (महामाया तंत्र)

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S.N. Khandelwal - Sanskrit & Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan

Mahamaya Tantra (महामाया तंत्र)

महामाया तंत्र (Mahamaya Tantra) महामायातन्त्र वास्तव में १४ पटलों में ही सीमित नहीं है, परन्तु इसका स्वरूप अत्यन्त वित्तृत कहा जाता है। सम्प्रति इसके मात्र १४ पटल ही उपलब्ध हो सके हैं, जिनका अनुवाद के साथ प्रकाशन किया जा रहा है।
                        इस ग्रंथ में १२वें पटल से पशु-दिव्य तथा वीरभाव का वर्णन प्रारम्भ करके रहस्य साधना का किंचित उद्घाटन किया गया है। इसके पश्चात् १३वें तथा १४वें पटल में पूर्णतः अन्य विषय भुवनेश्वरी कवच विधान तथा चण्डीपाठ की विधि वर्णित है। इससे प्रतीत होता है कि १२वें पटल से हो इसका विषयवस्तुगत तारतम्य खण्डित हो गया है और जिसे रहस्य साधना का वर्णन करते हुए १२वें पटल से विषय वस्तु को और विस्तृत करना था, बहु अंश लुप्त हो गया और १३वाँ तथा १४वाँ पटल कलान्तर मूलग्रंथ लेखन के बहुत बाद इसमें संयोजित कर दिया गया। यह गवेषणा का विषय है। फिर भी जो कुछ साधना प्रक्रिया इस ग्रंथ में अंकित है, वह साधक समाज का मार्गदर्शन कर सकेगी यह निःसंदिग्ध है।

Author : S.N. Khandelwal

Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan

Language : Sanskrit & Hindi

Edition : 2nd 2011

Pages : 80

Cover : Paper Back

ISBN :        -

Size : 12 x 1 x 18 ( l x w x h )

Weight : 

Item Code : BVS 0126

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